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बिहार में भाजपा-जदयू को बनाना है फार्मूला!

जिस तरह उत्तर प्रदेश में विपक्षी पार्टियों के लिए तालमेल बनाना मुश्किल हो रहा है उस तरह की मुश्किल बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन की पार्टियों की है। भाजपा, जदयू, लोजपा और रालोसपा के बीच सीटों का बंटवारा कैसे होगा, यह किसी को समझ में नहीं आ रहा है। लोक जनशक्ति पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता का कहना है की पहले उनकी पार्टी अपनी कुछ सीटें छोड़ने पर राजी थी। लेकिन अब जबसे दलित आंदोलन तेज हुआ औरर नीतीश कुमार के साथ रामविलास पासवान की दोस्ती बढ़ी है तब से लोजपा ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं।

पिछले लोकसभा चुनाव में जनता दल यू अलग थी। सो, 40 सीटें भाजपा, लोजपा और रालोसपा में बंटी थी। भाजपा 30 सीटों पर लड़ी थी। लोजपा को सात और रालोसपा को तीन सीटें मिली थीं। इस बार जदयू के साथ आने से पूरा समीकरण बिगड़ा है। पहले जब भाजपा और जदयू साथ होते थे तब जदयू 25 और भाजपा 15 सीटों पर लड़ती थी। तभी सवाल है कि अब भाजपा कितनी सीटें जदयू के लिए छोड़ सकती है?

पिछली बार जदयू 38 सीटों पर लड़ी थी और सिर्फ दो सीट जीत पाई थी। 24 सीटों पर उसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। भाजपा 30 सीटों पर लड़ कर 23 पर जीती है। बताया जा रहा है कि जदयू को दस सीटें दी जा सकती हैं। इसके लिए लोजपा और रालोसपा कोटे की एक एक सीट ली जाएगी और भाजपा अपने कोटे से आठ सीट छोड़ेगी। यानी भाजपा 22, जदयू दस, लोजपा छह और रालोसपा दो सीट पर चुनाव लड़े। इस फार्मूले में दो, तीन सीटें ऊपर नीचे हो सकती हैं और कुछ सीटों की अदला बदली भी हो सकती है।

 

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